Friday, 7 October 2016

भारत एक प्राचीन देश है । प्राचीनता के साथ इसका गौरवशाली इतिहास है । भारत के इतिहास की अनेक हैरतअंगेज घटनाएँ हैं, जिनका वर्णन भारत के ऐतिहासिक स्थल आज भी कर रहे हैं । भारत में ऐतिहासिक स्थलों की कमी नहीं है । इन दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए हमारे देश के ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटक भी प्रतिवर्ष आते हैं ।
इन ऐतिहासिक स्थलों की गाथाएँ सुनकर देश-विदेश के पर्यटक आज भी रोमांच का अनुभव करते हैं । भारत के लगभग सभी ऐतिहासिक स्थल वीरता, देशभक्ति, मानवता, प्रेम एवं त्याग आदि की कहानी कहते हैं । इनमें ज्यादातर स्थल दर्शनीय हैं ।
भारत के अनेक ऐतिहासिक स्थलों से मैं प्रभावित हुआ हूँ । परन्तु ताजमहल की सुंदरता मुझे बारम्बार अपनी ओर आकर्षित करती है । वास्तुशिल्प के दृष्टिकोण से ताजमहल इतिहास का एक सुंदर नमूना है । इसे इतिहास का एक अजूबा भी कहा जाता है ।
विश्व के सात आश्चर्यो में इसकी गणना की जाती है । भारी तादाद में देश-विदेश के पर्यटक प्रतिवर्ष इसे देखने आते हैं । ताजमहल से मुगल बादशाह शाहजहाँ की प्रेम-गाथा जुड़ी हुई है । शाहजहाँ ने इसका निर्माण अपनी बेगम मुमताज महल की याद में करवाया था ।
हजारों कारीगरों ने वर्षो तक इसके निर्माण में अपने हुनर का सहयोग दिया था । वास्तव में ताजमहल के निर्माण में वर्षो तक किया गया परिश्रम आज भी इसे देखकर स्पष्ट झलकता है । उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में स्थित ताजमहल को देखकर वर्तमान में इसके निर्माण की कल्पना भी सहज नहीं लगती ।
सफेद संगमरमर से निर्मित गुम्बद-आकार के ताजमहल के चारों कोनों पर चार गोल स्तम्भ स्थित हैं, जो इसके सौंदर्य में वृद्धि करते हैं । ताजमहल की सुंदरता सभी को बरबस अपनी ओर आकर्षित करती है और शाहजहाँ के प्रेम की याद दिलाती है ।
वास्तव में मुगल बादशाह शाहजहाँ अपनी बेगम मुमताज महल से बहुत प्रेम करते थे । उन्हें इमारतें बनवाने का भी शौक था । मुमताज महल की याद में उन्होंने ताजमहल का निर्माण इसी उद्देश्य से करवाया था, ताकि युगों-युगों तक मुमताज महल के प्रति उनका प्रेम जीवित रह सके ।
उनकी यह इच्छा अवश्य पूर्ण हुई है । आज भी ताजमहल को मुमताज महल के प्रति समत शाहजहाँ के प्रेम की निशानी के रूप में जाना जाता है । देश-विदेश के प्रेमी-युगल इस प्रेम-निशानी को देखकर प्रसन्न होते हैं ।

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